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प्रेम का चर्म सुख


हर साल फरवरी की तरह निकल रहा है, थोडा जल्दी।

वैसे फरवरी को आजकल प्रेम का महीना भी कहा जाने लगा है।

प्रेम, जी हाँ प्रेम ! पढकर ज़्यादा खुश होने की आवश्यकता नही है, क्योंकि प्रेम शब्द को पढकर या सुनकर एक अद्भुत रूप से प्रसन्नता का भाव हमारे मन मे आता है। इस शब्द को पढकर मस्तिष्क एक अलग प्रकार की प्रफुल्लित करने वाली और सिहरन पैदा करने वाली तरंगे शरीर मे दौडा देता है।


पर प्रेम के कई पक्ष है। जो प्रेम साकार हो गया वह प्रेमियो को अदम्य सुख देता है, और यदि प्रेम असफल हुआ तो वह अत्यंत ही पीडा दायक भी होता है। असफल प्रेम के भी कई प्रकार होते हैं।


एक होता है वह प्रेम जिसमे दोनो प्रेमी एक दूसरे को चाहते हैं पर किसी तीसरे कारक जैसे घर- परिवार, जाति- धर्म आदि की वजह से उनका प्रेम साकार नही हो पाता। और वे इस बात को आसानी से स्वीकार कर लेते हैं।


एक होते है एक तरफा आशिक जिनके इश्क को अपने काउंटर पार्ट से तवज्जो नही मिलती और ये इस मीठे से अहसास या कहे दर्द मे अपनी सारी ज़िदगी बिताना चाहते हैं, और इसका सबसे बडा नुकसान इनकी शादी के बाद इनके जीवन साथी को होता है, जिन्हे ये सम्पूर्ण रूप से कभी नही हो पाते।


आगे देखे तो एक होते हैं ऐसे आशिक जो किसी से बेइंतेहाँ मोहब्बत तो करते हैं पर अपने प्यार का इज़हार नही कर पाते, और सारी उमर पछताने मे ही लगा देते हैं, कि यार काश बोल दिया होता। इन्हे तो नाकाम आशिक भी नही कहा जा सकता।


अगला प्रकार उन आशिको का है जो किसी को अपनी झूठी बनावटी बातो मे उलझाकर झूठा प्रेम जताते हैं, वैसे तो उन्हे आशिक ही नही कहा जाना चाहिये, मगर फिर भी! दरअसल उन्हे लगता है कि वह सामने वाले को छल रहे हैं। पर सच तो यह है कि वह खुदको छल रहे होते हैं, और उन्हे इस बात का अहसास काई वर्षो बाद या या उम्र बीतने के साथ होता है।

क्योंकि प्रेम एक ऐसा अहसास है जो शास्वत है और यदि आपने किसी से सम्पूर्ण और शुद्ध प्रेम किया है तो आपने भावनात्मक रूप से अपने चर्म को पा लिया है। और ऐसे लोग जो झूठे प्रेम का दिखावा करते हैं, इस चर्म सुख से वंचित हो जाते हैं।


उनसे अच्छे तो वह लोग हैं जो छले गए हैं, क्योंकि उन्होने ने इनसे सम्पूर्ण प्रेम करके उस शास्वत भाव को छू लिया है।

 
 
 

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